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  • चरित्र ही कर्तव्य की कुंजी

    Shiv Das

    चरित्र और कर्तव्य अलग अलग विषय हैं इसलिए इनका तुलना आपस मे नही किया जा सकता ।

    चरित्र एक स्वाभाविक गुण है तथा कर्तव्य हमारा दायित्व है हमारा धर्म है ।

    चरित्र - सदैव सत्य बोलना , अपने कहे बातों को निभाना अर्थात किसी को जुबान देकर न पलटना, किसी कार्य को करते हैं तो ईमानदारी से करना यह उत्तम चरित्र से युक्त मनुष्य के लक्षण हैं साधारणत: किसी स्त्री को पुरुष द्वारा या किसी पुरुष को स्त्री द्वारा काम की दृष्टि से न देखना चरित्र समझा जाता है किंतु चरित्र का क्षेत्र व्यापक है । जो मनुष्य अपनी पत्नी को छोड़ सभी को माता, बहन, दीदी की दृष्टि से देखे स्त्रियों को केवल कामभोग का साधन मात्र न समझे , अपने बात का पक्का हो , जो सच्चा हो अर्थात झूठ न बोले , अपने कार्य और रिश्ते के प्रति ईमानदार रहे, जो ईमानदारी से कमाए धन में ही संतुष्टि करे भ्रष्टाचार या गलत तरीके से धन का अर्जन न करे वह चरित्रवान है। चरित्र का क्षेत्र इससे भी अधिक व्यापक है किंतु पूरा विस्तार देना मेरे वश में नही। शिव शिव शिव

    कर्तव्य - यहाँ कर्तव्य का तात्पर्य अपने दायित्व से है कोई भी मनुष्य बिना कर्तव्य का पालन किये सद्गति या मुक्ति को प्राप्त नही हो सकता किन्तु जो परमात्मा का निश्छल भक्त है या गीता का विशेष ज्ञानी है वह अवश्य प्राप्त हो सकता है।

    यहाँ यह जानना आवश्यक है कि कर्तव्य क्या है वेदों के अनुसार आचरण करना ही हमारा एक मात्र कर्तव्य है। सत्य बोलना, पराई स्त्री को माता की दृष्टि से देखना, लोभ न करना इत्यादि नियम वेदों में वर्णित है किंतु हमारा यह दुर्भाग्य है कि हम वेदों के ज्ञान से वंचित हैं। हमे प्रत्येक कार्य वेदों के अनुसार करना चाहिए यही हमारा कर्तव्य है। हम जो भी कार्य वेदों के विपरीत करते हैं वह अधर्म और जो वेदों में वर्णित नही उस कार्य को करना हमारा प्रमाद है अर्थात व्यर्थ का चेष्टा है। आप अपने माता पिता की सेवा कीजिये इत्यादि भी वेदों का ही आदेश है। शिव शिव शिव

    वेद कभी किसी के द्वारा बनाया नही गया यह सत्य है सत्य ईश्वर हैं ईश्वर के अविनाशी होने से सत्य स्वरूप वेद भी अविनाशी तथा अजन्मा हैं। इसका पालन पहले मनुष्य, देव , दैत्य तथा असुर भी करते थे वेद का पालन स्वयं परमात्मा अर्थात ब्रम्हा विष्णु महेश भी करते हैं क्योंकि वेद ही उनका स्वभाव है। शिव शिव शिव

    यहाँ चरित्र को बड़ा या कर्तव्य को बड़ा नही कहा जा सकता किन्तु यह जरूर कहा जा सकता है कि कर्तव्य साध्य और चरित्र साधन है अर्थात एक चरित्रवान पुरुष या चरित्रवती स्त्री ही अपने कर्तव्य का पालन कर सकता है अन्य नहीं। शिव शिव शिव...

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Krishna Kutumb
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