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  • हिन्दू धर्म की व्यवस्था

    Vinay Radhay Chaudhary

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    हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं जैसे चावल, रोली, आम के पत्ते, तिल, इत्र, नारियल आदि सबका अपना एक प्रतीकात्मक महत्त्व है. आपने ध्यान दिया होगा कि चाहे घर की पूजा हो, नए घर कागृह प्रवेश हो, नई गाड़ी या नया बिज़नेस किसी भी कार्य का शुभारंभ नारियल फोड़कर किया जाता है. नारियल को भारतीय सभ्यता में शुभ और मंगलकारी माना गया है. इसलिए पूजा-पाठ और मंगल कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है. नारियल को संस्कृत में 'श्रीफल' कहा जाता है और श्री का अर्थ लक्ष्मी है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी के बिना कोई भी शुभ काम पूर्ण नहीं होता है. इसीलिए शुभ कार्यों में नारियल का इस्तेमाल अवश्य होता है. और नारियल के पेड़ को संस्कृत में 'कल्पवृक्ष' कहा जाता है. माना जाता है कि 'कल्पवृक्ष' सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है. पूजा के बाद नारियल को फोड़ा जाता है और प्रसाद के रूप में सब में वितरित किया जाता है. यह माना जाता है कि पूजा में नारियल का इस्तेमाल करने की शुरुआत आदि शंकराचार्य द्वारा की गई है. हिन्दू धर्म में एक समय में मानव और पशु बलि को एक समान और बेहद आम समझा जाता था. मानव बलि को रोकने के लिए ही आदि शंकराचार्य ने मानव की जगह नारियल को प्रयोग करने की प्रथा चलाई थी. नारियल की तुलना इंसान के सिर से की जाती है, क्योंकि नारियल के छिलके पर मौजूद रेशे सिर के बालों जैसे, छिलका मानव खोपड़ी जैसा और अंदर का पानी खून जैसा प्रतीत होता है. पंडितों का कहना है कि नारियल का तोड़ना अहंकार के टूटने का प्रतिनिधित्व करता है. नारियल के बाहर का खोल अहंकार की तरह कड़क और ठोस होता है, जो जब तक तोड़ा न जाए, किसी गुण को न अन्दर आने देता है और ही बाहर जाने देता है. इस अहंकार के टूटने पर मनुष्य को श्वेत गिरी के समान दिव्य ज्ञान और भीतर पानी के रूप में अमृत प्राप्त होता है. आपने गौर किया होगा कि नारियल के ऊपरी हिस्से पर तीन निशान होते हैं, जिनको भगवान शिव की तीन आंखें माना जाता है. कुछ लोग इन तीन निशानों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तरह मानते हैं. ज्यादातर लोग नारियल को पूजा के दौरान तांबे के एक लोटे पर रखकर उस पर लाल कपड़ा चढ़ाते हैं. इस तरह से लोग त्रिदेवों से पूजा के दौरान वहां उपस्थित होने के लिए आग्रह करते हैं और अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखने के लिए प्रार्थना करते हैं. भगवान के चरणों में नारियल अर्पित करने से बुरी शक्ति, राहु और शनि की महादशा, वित्तीय समस्याएं, काला जादू, जैसी परेशानियां दूर हो जाती हैं. पूजा के बाद नारियल को प्रसाद के रूप में इसलिए बांटा जाता है क्योंकि जब नारियल भगवान की मूर्ति के संपर्क में आता है तो वह पवित्र हो जाता है. और जब एक भक्त उसे ग्रहण करता है तो उसका मन पवित्र हो जाता है. नारियल हमारे सिर का प्रतीक है, जिसके आस-पास न चाहते हुए भी अहंकार की भावना आ जाती है. पूजा के दौरान या किसी भी नेक कार्य से पहले एक नारियल फोड़कर हम ईश्वर से इस अहंकार को चूर करने की प्रार्थना करते हैं

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