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  • सत्व से स्मरण

    Ratnesh Kumar Sahu

    नर्क किसी को याद नही होता क्योंकि पापकर्मी जीवात्मायें नर्क जाती हैं पाप कम करने हेतु किन्तु स्वर्ग बहुतों को याद होता है इसका कारण यह है कि स्वर्ग पुण्य कर्मों का फल भोगने हेतु प्राप्त होता है और पुण्य के प्रभाव से ही पूर्वजन्म का स्मरण भी होता है ।यदि कोई पूर्वजन्म का स्मरण करना चाहें तो ध्यान करें इससे बुद्धि तीव्र होता है और हमे पूर्वजन्म का स्मरण होता है।

    दूसरा उपाय यह है कि नित्य गीता, भागवत इत्यादि का पाठी भी पूर्वजन्म का स्मरण कर लेता है ।

    यदि आप पूर्वजन्म में निरन्तर नामजप, तीव्र ध्यान या शास्त्र इत्यादि पाठ किये हैं तो आपको पूर्वजन्म आपके वर्तमान जन्म में शिशु अवस्था से ही ज्ञात होगा।

    भीष्म जी को उनके 7 जन्म याद थे पूरी तरह और सदैव रहे क्योंकि वे हरिभक्त थे और पुण्यात्मा भी।

    पाप से नर्क प्राप्त होता है और पाप से पूर्वजन्म का स्मरण नही होता यही कारण है कि नर्क भोग कर आयी जीवात्मा नर्क को भूल जाती है।

    हमें अपने पूर्वजन्म याद नहीं या बहुत कम याद हैं क्योंकि हमारे तप, नामजप,शास्त्र- वेद पाठ इत्यादि में कमी है।

    शिव शिव शिव...

    इस संसार मे मनुष्य बहुत हैं किंतु उनमें से कौन स्वर्ग भोग कर आया है, कौन मनुष्य था और मनुष्य ही हो गया तथा कौन नर्क से आया है इसका रहस्य आप उनके विचारों तथा स्वभाव से प्राप्त कर सकते हैं।

    जो पहले जन्म में भी मनुष्य थे उनके स्वभाव में कर्म कर फल पाने का भाव ज्यादा होगा वे दान भी करेंगे तो पुण्य की इच्छा से उनके प्रत्येक कार्य मे अपना स्वार्थ निहित होगा।

    जो नर्क से आये पाप कम होने के कारण उनका स्वभाव तामसी होगा दूसरों को कष्ट देने में उन्हें आनंद आएगा वे प्राय: नास्तिक होंगे, दुसरो की पीड़ा उन्हें स्वयं के सुख से भी ज्यादा प्रिय होगा।

    उनमे तथा जो पशु योनि से आये हैं उनमें भी मूढ़ता भाव विशेष रूप से होगा।

    जो स्वर्ग से आये हैं उनके स्वभाव में सत्व भाव अधिक होगा।

    वे सात्विक कर्म इसलिए नही करते कि बदले में उनका लाभ होगा अपितु इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें ऐसा करना अच्छा लगता है क्योंकि यह उनका स्वभाव है।

    वे प्रसन्न रहने वाले, भोलेपन से युक्त होंगे, नामजप , शास्त्र, पुराण इत्यादि पाठ में उनका विशेष रुचि होगा। उनकी बातों में किसी प्रकार के अपशब्दों(गालियों) का समावेश नही होगा वे हमेशा सभ्य तरीके से बात करेंगे शरीर को स्नानादि से सदा शुद्ध रखेंगे साफ वस्त्र पहनना उन्हें प्रिय होगा वे दान भी करेंगे तो इसके पीछे 2 कारण हो सकते हैं -

    1. इससे उनके आराध्य प्रसन्न होंगे - आराध्य सेवा

    2. इससे दान लेने वाले का भला होगा - जीव सेवा।

    उनके स्वभाव में उत्तम चरित्र, सब पर विश्वास, सत्यकथन, दया विशेष होता है।

    वो कोई कार्य करते हैं तो इसलिए नही करते कि उन्हें ये करना पसंद है बल्कि इसलिए करते हैं कि ये करना सही है अर्थात् वे मन के दास कम होते हैं न्याय प्रिय ज्यादा।

    शिव शिव शिव...

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