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  • श्री कृष्णा के देह त्याग की कथा

    यह कहानी उस समय की है जब त्रेता युग में भगवान श्री राम वन मैं अपने 14 वर्ष का बनवास पूरा कर रहे थे इसी दौरान रावण छल के द्वारा देवी सीता का हरण कर लेता है तब भगवान श्री राम और लक्ष्मण सीता जी को खोजते हुए एक वन में भटक रहे थे उसी समय भगवान श्रीराम की भेंट सुग्रीव नामक एक वानर से हो जाती है और सुग्रीव भी अपने भाई बाली द्वारा अपनी पत्नी के छीन लिए जाने से दुखी था इस कारण भगवान श्री राम और सुग्रीव एक दूसरे के मित्र बन जाते हैं , तब सुग्रीव भी सीता जी को तलाशने में उनकी सहायता करने का वचन देता है और भगवान श्री राम उसे उसके भाई बाली का वध करने उसका राज्य और उसकी पत्नी को वापस दिलाने का वचन देते हैं.

    आप यह तो जानते ही हो कि भगवान श्रीराम ने अपना वचन निभाने के लिए सुग्रीव और उसके भाई बाली के बीच युद्ध कराया था, और सुग्रीव से मल्ल युद्ध कर रहे बाली को छुपकर अपने बाप से मार गिराया था दोस्तों बाली बड़ा ही बलवान था उसे सामने से कोई भी योद्धा नहीं मार सकता था इस कारण भगवान श्रीराम ने उसे छुप के मारा था.

    बाली की मौत के बाद उसकी पत्नी तारा बहुत दुखी हुई थी और उसने क्रोध में आकर भगवान श्रीराम को श्राप दे दिया था कि जिस प्रकार तुमने मेरे पति को मारा है उसी प्रकार अगले जन्म में मेरा पति तुम्हे मारेगा।

    दोस्तों कहा जाता है कि बाली की पत्नी तारा के श्राप के कारण ही उसके पति बाली ने द्वापर में एक बहेलिया के घर जन्म लिया था। उस जन्म में उसका नाम जरा था। जरा रात के समय अपने धनुष बाण से पेड़ों पर बैठे पशु और पक्षियों का शिकार किया करता था। कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण के पैर के तलवे में जन्म से एक चिन्ह था जो रात के अंधेरे में चमकता था और वही चिन्ह उनकी मृत्यु का कारण बनेगा यह बात सिर्फ महाबली भीम के पोते यानी घटोत्कच पुत्र बर्बरीक को पता चल गई थी।

    एक रात भगवान श्री कृष्ण आनंद से नदी के तट पर एक पेड़ पर बैठे हुए थे तब उनके पैर के नीचे चमकते चिन्ह को देख शिकार पर निकले बहेलिए जहा को लगा कि वह किसी पक्षी की आंख है और उसने उसे लक्ष्य करके अपना तीर चला दिया जिससे भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु हो गई।

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